top of page
Search


खाने में मिलावट भ्रष्टाचार या धोखा?
एनालॉग पनीर के साथ ही खाद्य पदार्थों में मिलावट अचानक चर्चा में है। बात सिर्फ पनीर में मिलावट की नहीं है बल्कि बात यह है कि पनीर के नाम पर जो परोसा जा रहा है वह दूध से बना पनीर ही नहीं है वो एनालॉग पनीर है! अब प्रश्न यह उठता है कि हम में से कितने लोग इसका मतलब समझते हैं? हममें से अधिकांश लोगों के लिए पनीर दूध से बना प्रोटीन का पोषण से भरपूर एक बहेतरीन व्यंजन है। लेकिन एनालॉग पनीर असली दूध के बजाए वनस्पति तेल (पॉम ऑयल), स्टार्च, मिल्क पाउडर और केमिकल से बनाया जाने वाला एक कृत्
dr neelam mahendra
Aug 203 min read


आर्थिक स्वतंत्रता का नया अध्याय
1947 में मिली आज़ादी, एक स्वर्ण किरण थी! हमने तिरंगा फहराया, राष्ट्रगान गाया और एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में साँस ली। पर क्या वो स्वतंत्रता पूरी थी? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया उद्घोष – “भारत का सबसे बड़ा दुश्मन कोई विदेशी ताक़त नहीं, बल्कि हमारी निर्भरता है!” – इस गहन प्रश्न को एक बार फिर से जीवंत कर गया है। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि हमारे सामूहिक विवेक को झकझोरने वाला सत्य है, जो हमें उस शीशे के सामने खड़ा कर देता है जहाँ हमारी राजनीतिक आज़ादी की चमक, आर्थिक और
dr neelam mahendra
Aug 164 min read


इंडिगो: अव्यवस्था का जिम्मेदार कौन?
भारत की आकाश रेखा आज जितनी व्यस्त दिखाई देती है, उतनी शायद पहले कभी नहीं रही। रोज़ाना देश के आसमान में लगभग 4,500 उड़ानें चलती हैं। खास बात यह है कि इनमें से आधे से अधिक की कमान एक ही कंपनी “इंडिगो” के हाथ में है। डीजीसीए के 2023–24 के आंकड़े बताते हैं कि इंडिगो का मार्केट शेयर 65 प्रतिशत के आसपास है। यानी हर 100 यात्रियों में से लगभग 65 यात्री इंडिगो पर निर्भर हैं। किसी भी उद्योग में ऐसी स्थिति शायद ही देखने को मिले, जहां एक कंपनी पूरे बाजार की रीढ़ बन जाए। लेकिन जब रीढ़ ही
dr neelam mahendra
Aug 165 min read


पश्चिम में कम्युनिटी लिविंग का बढ़ता चलन
हाल ही में एक रिसर्च में यह बात सामने आई कि ब्रिटेन में परिवार के सदस्यों (दादा-दादी, माता-पिता, बच्चे) या गैर-पारिवारिक सदस्यों के साथ एक छत के नीचे रहने का चलन बढ़ रहा है। सिर्फ माता-पिता के साथ ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में सैकड़ों कम्युनिटी लिविंग ग्रुप्स बन गए हैं, जहाँ लोग सस्ते में रहते हैं और अकेलेपन से बचते हैं। वहां समाजशास्त्रियों की रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कम्युनिटी लिविंग या मल्टी-जेनरेशनल घरों में रहने वाले लोग अकेले य
dr neelam mahendra
Aug 164 min read


आयुर्वेद: प्राचीन चिकित्सा पद्धति का वैश्विक उत्थान
हाल ही में जयपुर के एसएमएस और उसके संबद्ध अस्पतालों में की गई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि मनुष्यों में एंटीबायोटिक दवाओं का असर 57% से 90% तक कम हो गया है। कुल 9776 मरीजों पर की गई रिसर्च में पता चला कि इनमें से एक भी मरीज ऐसा नहीं था जिसे एंटीबायोटिक का 60% भी असर हुआ हो। इन सभी के शरीर में एंटीबायोटिक्स के प्रति 60% से 98% तक रेजिस्टेंस आ गया है। जिन एंटीबायोटिक्स का असर बिल्कुल खत्म हो गया है उनमें सिप्रोफ्लाक्सासिन, एरोथ्रोमाइसिन, डॉक्सिसाइकिलिन, एमपीसीलिन जैसे ब्रॉड
dr neelam mahendra
Aug 165 min read


दिल्ली प्रदूषण : पर्यावरण नहीं स्वास्थ्य की समस्या बन चुका है
दिल्ली की हवा अब केवल प्रदूषित नहीं है, वह हमारे समय की सबसे बड़ी चुपचाप फैलती हुई आपदा बन चुकी है। यह संकट अचानक नहीं आया, बल्कि वर्षों की लापरवाही, गलत प्राथमिकताओं और आधे-अधूरे समाधानों का नतीजा है। हर सर्दी में जब स्मॉग की मोटी परत राजधानी को ढक लेती है, तब हम कुछ दिनों के लिए चिंतित होते हैं, फिर हालात सामान्य दिखने लगते हैं और हम मान लेते हैं कि समस्या टल गई। लेकिन सच यह है कि समस्या कहीं नहीं जाती, वह हमारे फेफड़ों में जमा होती रहती है। दिल्ली के प्रदूषण को समझने के लि
dr neelam mahendra
Aug 165 min read


बिहार परिणाम: राजनीति का नया अध्याय
बिहार परिणाम: राजनीति का नया अध्याय इस बार बिहार एक नए उजाले और बिल्कुल नए आत्मविश्वास के साथ जागा है। चुनावी नतीजों के शुरुआती रुझानों के साथ ही यह स्पष्ट हो गया था कि जनता ने इस बार केवल वोट नहीं डाला—अपनी राजनीति की दिशा खुद तय की है। क्योंकि शुरुआती रुझानों से लेकर अंतिम तस्वीर तक, पूरा परिदृश्य एक ही संदेश दे रहा था कि बिहार अब पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहता। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने शायद खुद भी इतनी विशाल विजय की कल्पना नहीं की थी। 243 में से 207 सीटों का प्रचंड बह
dr neelam mahendra
Aug 163 min read


दूध में मिलावट: आर्थिक अपराध नहीं नैतिक पतन की पराकाष्ठा
भारत आज गर्व से दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश होने का दावा करता है। वैश्विक दूध उत्पादन में हमारी हिस्सेदारी लगभग 25% है। आंकड़ों की बाजीगरी में हम नंबर वन हैं, लेकिन क्या कभी हमने उस दूध के गिलास की गहराई में झांक कर देखा है जिसे हम 'अमृत' समझकर अपने बच्चों को पिलाते हैं? हालिया रिपोर्ट्स और समाचार पत्रों के दावे चौंकाने वाले ही नहीं, रूह कंपा देने वाले हैं। क्योंकि दुर्भाग्य से आज देश भर में जांचे गए दूध के हर तीन में से एक नमूना जांच में फेल हो रहा है। यह महज एक सा
dr neelam mahendra
Aug 164 min read
एक छात्र के प्रश्न : और पूरा तंत्र
एक छात्र के प्रश्न : और पूरा तंत्र भारत की सभ्यता में परीक्षा केवल अंकों का खेल नहीं रही। हमारे यहाँ परीक्षा का अर्थ रहा है,स्वयं को सिद्ध करना, अपनी योग्यता को समाज के समक्ष प्रमाणित करना और अपने श्रम को सम्मान दिलाना। यही कारण है कि भारतीय परिवारों में परीक्षा केवल विद्यार्थी नहीं देता, उसके साथ पूरा परिवार परीक्षा देता है। माँ अपनी नींद त्यागती है, पिता अपनी इच्छाएँ स्थगित करता है और छात्र अपनी किशोरावस्था का बड़ा हिस्सा पुस्तकों के बीच छोड़ आता है। किन्तु आज प्रश्न यह है
dr neelam mahendra
Aug 164 min read


क्या सचमुच नारीवाद हार रहा है, या आधुनिक जीवन?
क्या सचमुच नारीवाद हार रहा है, या आधुनिक जीवन? अभी कुछ समय पहले तक यदि कोई युवती कैमरे के सामने खड़ी होकर रोटी बेलती, बच्चों के लिए भोजन बनाती, पति के लिए टिफ़िन तैयार करती और यह कहती कि उसे अपने परिवार के साथ रहना पसंद है, तो आधुनिक विमर्श उसे पिछड़ेपन का प्रतीक घोषित करने में देर नहीं लगाता। लेकिन आज वही दृश्य करोड़ों लोगों को आकर्षित कर रहा है। अमेरिका की हन्ना नीलमैन और नारा स्मिथ जैसी सोशल मीडिया हस्तियाँ केवल लोकप्रिय नहीं हुईं, वे एक बहस बन गईं। उनके वीडियो में कोई क्र
dr neelam mahendra
Aug 164 min read


नैरेटिव के युद्ध के लिए क्या हमारे बच्चे तैयार हैं
नैरेटिव के युद्ध के लिए क्या हमारे बच्चे तैयार हैं वर्तमान परिदृश्य में यह प्रश्न हम सभी के मन में उठ रहा है, “क्या सचमुच हमारे बच्चे, खास तौर पर बेटियाँ, बदल रही हैं? या उनके चारों ओर की दुनिया इतनी तेजी से बदल गई है कि हम उन्हें समझाने में कहीं पीछे छूट गए?” जंतर-मंतर पर जेन जी के प्रदर्शन की तस्वीरें कई प्रश्न खड़े कर रही हैं। जैसे,क्या इन बच्चों में भारतीय संस्कृति का तत्व हम डाल ही नहीं पाए? या फिर यह नई पीढ़ी की अभिव्यक्ति का तरीका है? शायद उत्तर दोनों प्रश्नों के बीच ह
dr neelam mahendra
Aug 163 min read


Exploring the Themes of Panchkanya in Mythology
The Panchkanya are five revered women in Hindu mythology. Their stories are complex and layered. They appear in various texts and traditions, symbolizing different aspects of life, morality, and spirituality. The Panchkanya are Ahalya, Draupadi, Kunti, Tara, and Mandodari. Each woman has a unique narrative that challenges conventional norms and offers insights into human nature and divine intervention. Themes of Panchkanya in Mythology The Panchkanya represent themes such as
dr neelam mahendra
Jun 293 min read
डिजिटल लोरी के साये में सुबकता बचपन
# डिजिटल लोरी के साये में सुबकता बचपन बदलती हुई दुनिया में बच्चों का बचपन कभी बच्चे की पहली दुनिया मां की गोद हुआ करती थी। उसकी पहली पाठशाला घर का आंगन था। उसका पहला मनोरंजन मिट्टी में खेलना था। उसकी नन्हीं दुनिया की पहली कहानी दादी और नानी की आवाज में होती थी। उसका पहला खिलौना कोई लकड़ी का घोड़ा या कपड़े की गुड़िया होता था। लेकिन आज तस्वीर बदल गई है। अब बच्चे की पहली दुनिया एक चमकती हुई स्क्रीन है। पहली लोरी यूट्यूब का वीडियो है। पहला दोस्त कोई कार्टून चरित्र है। और पहला खिल
dr neelam mahendra
Jun 225 min read
RAMA VS RAM
ABOUT THE BOOK : इस पुस्तक को लिखने का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि जी द्वारा जो प्रभु श्रीराम का चित्रण किया गया है उसका विशुद्ध और प्रमाणिक स्वरूप प्रस्तुत करना है। प्रभु श्रीराम को लेकर जो मिथक अवधारणाएं आम जन के मन में हैं, उन्हें दूर करने का प्रयत्न लेखिका के द्वारा किया गया है। श्रीराम द्वारा सीता का परित्याग हो या लक्ष्मण रेखा हो, शम्बूक वध हो या रामायण में मांसाहार का वर्णन हो, महर्षि वाल्मीकि जी के मुनि बनने से पूर्व उनके एक डाकू होने की बात हो या शबरी द्वारा श्रीराम को
dr neelam mahendra
Feb 18, 20251 min read
bottom of page